ड्रैगन की लगाम कसने को तैयार है अमेरिका, चीन से ताइवान को बचाने के लिए बाइडेन बनेंगे आयरन मैन


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America can impose severe sanctions on China!

Highlights

  • ड्रैगन की लगाम कसने को तैयार है अमेरिका
  • चीन से ताइवान को बचाने के लिए बाइडेन बनेंगे आयरन मैन
  • चीन पर प्रतिबंध लगाना रूस की तरह आसान नहीं है

चीन और ताइवान के बीच बढ़ते युद्ध के खतरे को देखते हुए अमेरिका सतर्क हो गया है। अमेरिका अब खुल कर ताइवान के समर्थन में खड़ा हो गया है। बात तो यहां तक आ गई है कि चीन के हमले से ताइवान को बचाने के लिए जल्द ही अमेरिका चीन पर प्रतिबंधों का बम फोड़ने वाला है। वहीं दूसरी ओर ताइवान यूरोपियन यूनियन पर दबाव बना रहा है कि वह चीन के खिलाफ ऐसे ही प्रतिबंध लगाए। दरअसल, आज के दौर में युद्ध सीधे तौर पर कम लड़े जाते हैं। ज्यादातर देशों की चाहत होती है कि वह अपने विरोधी पर कूटनीतिक जीत हासिल करें, जिससे उस पर आर्थिक और सामाजिक दबाव बढ़े। 

ताइवान चीन की अर्थव्यवस्था पर मार करना चाहता है

ताइवान को पता है कि चीन जैसे बड़े देश को तोड़ने के लिए उस पर आर्थिक दबाव बनाया जाए। यही वजह है कि चीन अब अपने सहयोगी अमेरिका पर दबाव बना रहा है कि वह चीन पर प्रतिबंध लगाए ताकि ड्रैगन को आर्थिक मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़े। ताइवान चाहता है कि अमेरिका चीन पर सेमीकंडक्टर और चिप से बढ़कर और भी कई प्रतिबंध लगाए। हालांकि, चीन जिस तरह से पूरी दुनिया में अपनी सप्लाई चेन बनाए हुए है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि अगर चीन पर इस तरह के कड़े प्रतिबंध लगाए गए तो दुनियाभर के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। 

चीन पर प्रतिबंध लगाना रूस की तरह आसान नहीं है

हालांकि, अमेरिका का चीन पर इतने कड़े प्रतिबंध लगाना इतना आसान नहीं है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका रूस की तरह चीन पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता क्योंकि ऐसा करने पर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा और इनमे अमेरिका के कई दोस्त भी शामिल होंगे। अब यह फैसला अमेरिका को करना है कि एक दोस्त को बचाने के लिए क्या वह अपने कई दोस्तों को मुश्किल में डाल सकता है।

ताइवान का अपने ‘चिप’ पर तने रहना

ताइवान एक ऐसा देश है दुनिया में इस्तेमाल होनी वाली कुल चिप का 90 फीसदी हिस्सा अपने यहां तैयार करता है। वहीं सेमीकंडक्टर भी ताइवान में भारी मात्रा में बनाए जाते हैं। अब ताइवान अपनी इस बेहद एडवांस तकनीक को अमेरिका में सिर्फ इस शर्त पर भेजने की बात कर रहा है कि अमेरिका चीन पर गंभीर प्रतिबंध लगाए।

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