100 प्रतिशत ईवी हों दोपहिया, तिपहिया


दीपक पटेल / नई दिल्ली September 14, 2022






 मारुति सुजूकी इंडिया के कार्यकारी उपाध्यक्ष केनिची आयुकावा ने आज कहा कि भारतीय वाहन उद्योग ने बड़े पैमाने पर लाभ प्राप्त किया है और इसे दीर्घकालिक टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने के लिए अच्छी गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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आयुकावा ने कहा कि भारतीय ऑटो उद्योग एक अनोखे दौर से गुजर रहा है क्योंकि कुछ क्षेत्रों में महामारी के बाद रिकवरी होना शुरू हो गई है, जबकि अन्य अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। आयुकावा सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) के अध्यक्ष भी हैं।  

उन्होंने कहा, उदाहरण के लिए, छोटी कारों और दोपहिया वाहनों में अधिक वृद्धि और खरीद की कीमत में बढ़ोतरी के कारण मांग में भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।  

खराब मांग के कारण दुनिया के सबसे बड़े बाजार में दोपहिया वाहनों की बिक्री पिछले दो वर्षों से धीमी हो गई है। हालांकि पिछले 3-4 महीनों के दौरान इनमें विस्तार हो रहा है, लेकिन महामारी के पहले की अवधि में उद्योग द्वारा देखी गई बिक्री से काफी नीचे हैं।

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि अगस्त में दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री सालाना आधार पर 8.5 फीसदी बढ़कर 1,074,266  यूनिट हो गई, लेकिन अगस्त 2019 की तुलना में 16 फीसदी कम रही। आयुकावा ने कहा कि छोटी कारों और दोपहिया वाहनों के अलावा अन्य सेगमेंट में अच्छी मांग देखी जा रही है, लेकिन आपूर्ति पक्ष के सामने काफी चुनौतियां हैं, जिसमें मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर की कमी है। 

उन्होंने कहा, कुल मिलाकर, इन चुनौतियों के कारण सभी सेगमेंट अभी भी उद्योग के 2018-19 के उच्च स्तरीय बाजार से नीचे हैं, चाहे वह यात्री वाहन हों, दोपहिया, तिपहिया या वाणिज्यिक वाहन हों । 

उन्होंने कहा कि भारतीय ऑटो उद्योग को स्थानीयकरण बढ़ाने और नई और भविष्य की प्रौद्योगिकियों में निवेश करने पर ध्यान देना चाहिए।

आयुकावा ने कहा, हमें इस पर गहराई से विचार करना होगा और जहां भी संभव हो, कच्चे माल सहित छोटे पुर्जों को स्थानीयकृत करने के तरीके खोजने होंगे।

उन्होंने कहा कि भारतीय ऑटो उद्योग ने घरेलू बाजार और निर्यात दोनों में बड़े पैमाने पर बढ़त हासिल की है।

लगभग 120 अरब अमेरिकी डॉलर के कारोबार के साथ, भारतीय ऑटो उद्योग भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 6 फीसदी और विनिर्माण उत्पादन में 35 फीसदी की हिस्सेदारी करता है।

उन्होंने कहा, इस बड़े पैमाने पर गुणवत्ता बहुत अधिक महत्व रखती है। कोई भी छोटी सी गलती न केवल उद्योग के लिए बल्कि मेक इन इंडिया ब्रांड के लिए हानिकारक हो सकती है।

उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए, उद्योग को गुणवत्ता के उच्च स्तर को सुधारने और लगातार बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि ऑटो उद्योग को मुख्य व्यवसाय में फिर से निवेश करने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा, मैं हमेशा मारुति सुजुकी में अपने आपूर्तिकर्ता पार्टनरों से कहता हूं कि मुख्य व्यवसाय में फिर से निवेश करना बहुत महत्वपूर्ण है। यह न केवल वित्तीय स्थिति को मजबूत करता है बल्कि चुनौतियों से निपटने की क्षमता में भी सुधार करता है।

 



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