SCO Summit 2022 : LAC पर तनाव के बीच जब समरकंद में मिलेंगे जिनपिंग और मोदी, तो मन में क्या चल रहा होगा

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उजबेकिस्तान के शहर समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं। पीएम मोदी के यहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात होने की संभावना है। ऐसे में जब दो साल बाद दोनों देशों के शीर्ष नेता मिलेंगे तो दुनिया की नजरें इस मुलाकात पर होंगी। दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव के बीच यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। सीमा पर तनाव के साथ ही दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार का मुद्दा भी काफी अहम है। ऐसे में जब पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति से मिलेंगे तो टकराव के मुद्दों पर आम सहमति से सुलझाने के साथ ही विकास के मुद्दे पर एक साथ आगे बढ़ने पर बातचीत हो सकती है। विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कि पीएम मोदी शुक्रवार को शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। हालांकि, शी के साथ आमने-सामने की मुलाकात को लेकर कोई पुष्टि नहीं की। चीन ने भी अभी तक दोनों नेताओं के बीच बैठक की पुष्टि नहीं की है।

गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स पर सहमति से बनी बात
चीन ने गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स में पेट्रोल प्वाइंट 15 से अपने सैनिकों को वापस लेने की भारत की मांग को पिछले दिनों स्वीकार कर लिया था। कुछ विशेषज्ञों ने इसे पूर्वी लद्दाख में जारी सैन्य गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में कदम बताया जो मई 2020 में शुरू हुआ था। इसके बाद ही दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया था। दोनों देशों ने श्रृंखलाबद्ध सैन्य एवं कूटनीतिक वार्ताओं के परिणाम स्वरूप पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण किनारों पर तथा गोगरा इलाके से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया पूरी की थी। पेट्रोल प्वाइंट 15 से सैनिकों की वापसी के बाद से समरकंद में मोदी और शी चिनफिंग की मुलाकात की संभावना को लेकर अटकल शुरू हो गई थी।

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कोरोना के बाद पहली बार बाहर निकले ही जिनपिंग
कोविड की चिंताओं को छोड़ते हुए एससीओ सम्मेलन में जिनपिंग के शामिल होने की आकस्मिक घोषणा हुई। वह बुधवार को दो साल से अधिक समय की अवधि के बाद पहली बार चीन के बाहर गये हैं। वह जनवरी 2020 के बाद से अपनी पहली सरकारी यात्रा पर कजाकिस्तान गए। जिनपिंग वहां से समरकंद में एससीओ सम्मेलन में भाग लेने के लिए उज्बेकिस्तान जाएंगे। चीन ने अपने कार्यक्रमों से पर्दा नहीं उठाया है। शी चिनफिंग की सम्मेलन से इतर पुतिन एवं मोदी से मुलाकात की खबरों की पुष्टि नहीं की है।
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आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चर्चा
एससीओ शिखर सम्मेलन में सामयिक, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों, एससीओ के सुधार और विस्तार, क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति, क्षेत्र में हमारे सहयोग, संपर्क को मजबूत करने और क्षेत्र में व्यापार को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी। एससीओ में भारत के हित क्षेत्रीय विषयों से जुड़े हैं जिसमें सदस्य देशों के साथ सहयोग प्रमुख है। इस सहयोग में आर्थिक सहयोग, सुरक्षा सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चर्चा आदि शामिल हैं । ऐसे में भारत इसे किसी एक देश की नहीं बल्कि क्षेत्रीय सहयोग की केंद्रीयता के रूप में देखता है।

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दो साल बाद आमने-सामने होंगे नेता
वर्ष 2019 के बाद से यह एससीओ का पहला शिखर सम्मेलन होगा जिसमें नेताओं की भौतिक उपस्थिति रहेगी। जून 2019 में एससीओ सम्मेलन किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित हुआ था। वर्ष 2020 में मास्को शिखर सम्मेलन कोविड-19 महामारी के कारण ऑनलाइन तरीके से आयोजित किया गया था। वहीं, दुशांबे में 2021 शिखर सम्मेलन ‘‘हाइब्रिड’’ तरीके से आयोजित किया गया था। एससीओ का मुख्यालय बीजिंग में है। इसमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान शामिल हैं। बीजिंग में राजनयिक सूत्रों ने पहले कहा था कि मेजबान उज्बेकिस्तान ने सभी नेताओं की उपस्थिति की अनौपचारिक रूप से पुष्टि की है।

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