पीएफसी बदलेगी ऊर्जा सूरत


ऊर्जा मंत्रालय इस एनबीएफसी को दिलाना चाहता है देश की पहली डीएफआई का दर्जा
श्रेया जय / नई दिल्ली September 14, 2022






पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) को देश में ऊर्जा की सूरत बदलने के लिए वित्तीय मदद देने वाली शीर्ष संस्था बताते हुए केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने उसे विकास वित्तीय संस्थान (डीएफआई) का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद वैश्विक जलवायु के लिए वित्तीय सहयोग और देश में नेट जीरो निवेश को बढ़ावा देना है।

इसके साथ ही बिजली के क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) पीएफसी भारत में जलवायु और ऊर्जा रूपांतरण के लिए पहली डीएफआई बन जाएगी। कई बहुपक्षीय, विकास एवं सरकारी वित्तीय कंपनियां कहती आई हैं कि भारत में जलवायु से संबंधित कर्ज और सहायता देने के लिए कोई नोडल एजेंसी नहीं है।


सूत्रों ने कहा कि बिजली मंत्रालय ने पीएफआई के लिए डीएफसी का दर्जा नैशनल बैंक फॉर फाइनैंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐंड डेवलपमेंट एक्ट, 2021 के तहत मांगा है और वित्त मंत्रालय को भी इसके लिए चिट्ठी लिखी है। डीएफआई का दर्जा वित्तीय संस्था को सार्वजनिक वित्तीय संस्था की तुलना में विदेश से वित्तीय सहयोग, अनुदान और कर्ज आसानी से तथा अधिक मात्रा में हासिल करने में मदद करता है। पीएफसी को सार्वजनिक वित्तीय संस्था का दर्जा पहले से हासिल है।


एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘मंत्रालय ने प्रस्ताव रखा है कि देश में नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करने के लिए डीएफआई की जरूरत है और पीएफसी यह भूमिका निभाने के लिए एकदम सही है क्योंकि कार्बन कम करने (डीकार्बनाइजेशन) के लिए कुल निवेश में 80 फीसदी ऊर्जा क्षेत्र में ही आएगा। उसने वित्त मंत्रालय से पीएफसी को जरूरी अनुमतियां प्रदान करने के लिए कहा है।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लासगो 2021 में कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज – 26 (सीओपी – 26) के दौरान घोषणा की थी कि भारत 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन (नेट जीरो) वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगी।


सूत्र ने बताया कि वित्त मंत्रालय प्रस्ताव को मंजूरी देगा और डीएफआई के लिए जरूरी संसाधन तथा अनुमति भी प्रदान करेगा। मगर एनबीएफसी के लिए डीएफआई दर्जे पर आखिरी मुहर आरबीआई लगाएगा। एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘पीएफसी पूरी जांच-परख के बाद आरबीआई के पास अर्जी डालेगी। कंपनी नेट जीरो निवेश योजना तैयार करने के लिए सलाहकार रख रही है। हम ऐसा औद्योगिक क्षेत्र तलाश रहे हैं, जिसे डीकार्बनाइजेशन के लिए वित्तीय मदद की जरूरत है।’

एनबीएफआईडी एक्ट, 2021 में अर्थव्यवस्था के ऐसे हिस्सों को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए डीएफआई बनाने की बात कही गई है, जहां ‘वाणिज्यिक बैंकों और सामान्य वित्तीय संस्थाओं की स्वीकार्य सीमा से भी अधिक जोखिम हैं। डीएफआई बैंकों की तरह लोगों को अपने यहां रकम जमा नहीं करने देते।

उसके बजाय वे बाजार, सरकार और बहुपक्षीय संस्थाओं से धनराशि हासिल करते हैं और कानून के मुताबिक अक्सर उन्हें सरकारी गारंटी का समर्थन हासिल होता है।’उन्हीं की तर्ज पर पीएफसी भी विभिन्न ढांचागत क्षेत्रों में डीकार्बनाइजेशन परियोजनाओं और नेट जीरो मूल्य श्रृंखलाओं के लिए कर्ज बढ़ा रही है। उसने कर्ज देने के लिए तेल कंपनियों की हरित ऊर्जा परियोजनाओं, हरित हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और सौर विनिर्माण की पहचान भी कर ली है।


पीएफसी के कुल कर्ज में से 47 फीसदी पारंपरिक बिजली उत्पादन के लिए दिया गया है और कुछ समय से यह लगातार घटता जा रहा है क्योंकि क्षेत्र में निवेश भी ठहर गया है। 

 

हरित ऊर्जा के लिए पीएफसी का कर्ज बढ़ा है मगर कुल कर्ज में उसकी हिस्सेदारी 10 फीसदी ही है। पीएफसी में एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि कंपनी देश की ‘नेट जीरो एजेंसी’ के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहती है। उन्होंने कहा, ‘आगामी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में पीएफसी भी अपने मेमोरेंडम ऑफ असोसिएशन में संशोधन कर अपने उद्देश्यों में विस्तार करना चाहती है ताकि वह बिजली से इतर क्षेत्रों को भी कर्ज दे सके।’अपनी एजीएम के लिए एजेंडा की सूचना में पीएफसी ने कहा, ‘बदले कारोबारी माहौल में उभरते मौकों का फायदा उठाने और ढांचागत क्षेत्र को अपनी वित्त एवं विकास संबंधी जरूरतें पूरी करने के लिए वित्तीय सहायता हासिल करने में मदद करने के इरादे से कंपनी के उद्देश्यों में विस्तार करने का प्रस्ताव है। इसके लिए एक नया प्रावधान – लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों को भारत सरकार द्वारा मंजूर सीमा तक कर्ज देना जोड़ा जाएगा।’उद्योग के अनुमान के मुताबिक नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत को 10 लाख करोड़ डॉलर की आवश्यकता होगी।

सीईईडब्ल्यू-सीईएफ की एक रिपोर्ट में कहा गया है – ‘अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग प्रौद्योगिकियां अपनाने के साथ ही भारत के नेट जीरो संकल्प के लिए बुनियादी ढांचे में बहुत भारी निवेश करना होगा। 2070 तक नेट जीरो के लक्ष्य के तहत 10.1 लाख करोड़ डॉलर का निवेश जुटाने और निवेश में 3.5 लाख करोड़ डॉलर की कमी पूरी करने के लिए भारत को उस समय तक 1.4 लाख करोड़ डॉलर निवेश सहायता की जरूरत होगी।’



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