1965 के युद्ध में पाकिस्तान को घुटनों पर लाने वाले एयर मार्शल अर्जन सिंह की कहानी, CM गहलोत ने दी श्रद्धांजलि

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Arjan Singh Death Anniversary: 1965 की जंग में पाकिस्तान को घुटनों पर लाने वाले एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह को आज पूरे देश याद कर रहा है। भारतीय वायुसेना के इकलौते मार्शल अर्जन सिंह की आज पुण्यतिथि है। 15 अप्रैल 1919 को जन्मे अर्जन सिंह औलख का 98 साल की उम्र में 16 सितंबर 2017 को निधन हो गया था। असाधारण नेतृत्व क्षमता के धनी अर्जन सिंह भारतीय वायुसेना के इकलौते अफसर थे जिनको फील्ड मार्शल के बराबर फाइव स्टार रैंक मिली थी। उनके अदम्य साहस की वजह से केंद्र सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। भारत सरकार ने उन्हें एयर चीफ मार्शल पद पर पदोन्नत किया था।

पुण्यतिथि पर अशोक गहलोत ने अर्जन सिंह को दी श्रद्धांजलि

एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह की पुण्यतिथि पर राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने उन्हें नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘भारतीय वायु सेना के मार्शल अर्जन सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि, 1965 युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के प्रमुख के तौर पर उनकी अनुकरणीय भूमिका को कभी नहीं भुलाया जा सकता। उनका पराक्रम, साहस और समर्पण हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा।’

अर्जन सिंह पर सीएम गहलोत ने किया ये ट्वीट

वायुसेना के इकलौते अफसर, जिन्हें फील्ड मार्शल के बराबर फाइव स्टार रैंक मिली

भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद अर्जन सिंह ने राजनयिक, राजनीतिज्ञ और सलाहकार के तौर पर भी सेवाएं दी। साल 1989 से लेकर 1990 तक वे दिल्ली के उपराज्यपाल भी रहे। वर्ष 2002 में भारतीय वायुसेना के मार्शल पद पर आसीन किया गया। यह पहला मौका था जब पहली बार वायुसेना के किसी अधिकारी को फील्ड मार्शल के बराबर फाइव स्टार रैंक का सम्मान प्रदान किया गया।

स्विट्जरलैंड में राजदूत भी रहे एयर मार्शल अर्जन सिंह

1965 में भारत सरकार ने अर्जन सिंह को पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया था। वे अगस्त 1964 से जुलाई 1969 तक वायु सेना के प्रमुख रहे। भारत-पाकिस्तान युद्ध में अदम्य साहस दिखाने के कारण केंद्र सरकार ने उन्हें वायुसेना अध्यक्ष से पदोन्नत करके एयर चीफ मार्शल बनाया। सन 1969 में 50 साल की उम्र में उन्होंने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृति) ले ली थी। सेवा निवृति के बाद 1971 में उन्हें स्विट्जरलैंड में भारतीय राजदूत के रूप में नियुक्त किया। इसके बाद उन्होंने समवर्ती वेटिकन के राजदूत के रूप में भी सेवाएं दी।

(रिपोर्ट – रामस्वरूप लामरोड़, जयपुर)

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